मकर -संक्रांति का महत्त्व


प्रति-वर्ष १४ जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा एवं उल्लास क़े साथ मनाया जाता है.१४ जनवरी २०१० की सांय ६ .४२ पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश हो रहा है (“चंड मार्तंड” निर्णय सागर पंचांग नीमच एवं श्री वेंकटेश्वर शताब्दी पंचांगम के अनुसार,परन्तु लखनऊ क़े समाचार पत्रों में अर्ध रात्री को सूर्य संक्रमण बताया जाना एक भ्रामक समाचार है) अतः स्नान-दान,हवन आदि प्रक्रियाएं १५ ता.की प्रातः ही होनी चाहिए.परन्तु लकीर क़े फ़कीर लोग १४ जन.की प्रातः ही यह सब पुण्य कार्य सम्पन्न कर लेंगे.हाँ यदि १४ ता. की रात्रि में कहीं कोई कार्य होने हों तो करना ठीक है.जो लोग १४ ता. की प्रातः मकर संक्रांति मनायें वे ध्यान रखें कि,वे ऐसा धनु क़े सूर्य रहते ही कर रहे हैं,क्या यह वैज्ञानिक दृष्टि से उचित रहेगा?.मकर संक्रांति क़े  दिन से सूर्य उत्तरायण होना प्रारम्भ होता है.सूर्य लगभग ३० दिन एक राशि में रहता है.१६ जूलाई को कर्क राशि में आकर सिंह ,कन्या,तुला,वृश्चिक और धनु राशि में छै माह रहता है.इस अवस्था को दक्षिणायन कहते हैं.इस काल में सूर्य कुछ निस्तेज तथा चंद्रमा प्रभावशाली रहता है और औषधियों एवं अन्न की उत्पत्ति में सहायक रहता है.१४ जनवरी को मकर राशि में आकर कुम्भ,मीन ,मेष ,वृष और मिथुन में छै माह रहता है.यह अवस्था उत्तरायण कहलाती है.इस काल में सूर्य की रश्मियाँ तेज हो जाती हैं और रबी की फसल को पकाने का कार्य करती हैं.उत्तरायण -काल में सूर्य क़े तेज से जलाशयों ,नदियों और समुन्द्रों का जल वाष्प रूप में अंतरिक्ष में चला जाता है और दक्षिणायन काल में यही वाष्प-कण पुनः धरती पर वर्षा क़े रूप में बरसते हैं.यह क्रम अनवरत चलता रहता है.दक्षिण भारत में पोंगल तथा पंजाब में लोहिणी,उ.प्र.,बिहारऔर बंगाल में खिचडी क़े रूप में मकर संक्रांति का पर्व धूम-धाम से सम्पन्न होता है.इस अवसर पर छिलकों वाली उर्द की डाल तथा चावल की खिचडी पका कर खाने तथा दान देने का विशेष महत्त्व है.इस दिन तिल और गुड क़े बने पदार्थ भी दान किये जाते हैं.क्योंकि,अब सूर्य की रश्मियाँ तीव्र होने लगतीं हैं;अतः शरीर में पाचक अग्नि उदीप्त करती हैं तथा उर्द की डाल क़े रूप में प्रोटीन व चावल क़े रूप में कार्बोहाईड्रेट जैसे पोषक तत्वों को शीघ्र घुलनशील कर देती हैं,इसी लिये इस पर्व पर खिचडी  खाने व दान करने का महत्त्व निर्धारित किया गया है.गुड रक्तशोधन का कार्य करता है तथा तिल शरीर में वसा की आपूर्ति करता है,इस कारण गुड व तिल क़े बने पदार्थों को भी खाने तथा दान देने का महत्त्व रखा गया है.

जैसा कि अक्सर हमारे ऋषियों ने वैज्ञानिक आधार पर निर्धारित पर्वों को धार्मिकता का जामा पहना दिया है,मकर-संक्रांति को भी धर्म-ग्रंथों में विशेष महत्त्व दिया गया है.शिव रहस्य ग्रन्थ,ब्रह्म पुराण,पद्म पुराण आदि में मकर संक्रांति पर तिल दान करने पर जोर दिया गया है.हमारा देश कृषि-प्रधान रहा है और फसलों क़े पकने पर क्वार में दीपावली तथा चैत्र में होली पर्व मनाये जाते हैं.मकर संक्रांति क़े अवसर पर गेहूं ,गणना,सरसों आदि की फसलों को लहलहाता देख कर तिल,चावल,गुड,मूंगफली आदि का उपयोग व दान करने का विधान रखा गया है,जिनके सेवन से प्रोटीन,वसा,ऊर्जा तथा उष्णता प्राप्त होती है.”सर्वे भवन्तु सुखिनः”क़े अनुगामी हम इन्हीं वस्तुओं का दान करके पुण्य प्राप्त करते हैं.

दान देने का विधान बनाने का मूल उद्देश्य यह था कि,जो साधन-विहीन हैं और आवश्यक पदार्थों का उपभोग करने में अक्षम हैं उन्हें भी स्वास्थ्यवर्धक  पदार्थ मिल सकें.यह एक दिन का दान नहीं बल्कि इस ऋतु-भर का दान था.लेकिन आज लोग साधन-सम्पन्न कर्मकांडियों को एक दिन दान देकर अपनी पीठ थपथपाने लगते हैं.जबकि,वास्तविक गरीब लोग वंचित और उपेक्षित  ही रह जाते हैं.इसलिए आज का दान ढोंग-पाखण्ड से अधिक कुछ नहीं है जो कि, ऋषियों द्वारा स्थापित विधान क़े उद्देश्यों को पूरा ही नहीं करता.क्या फिर से प्राचीन अवधारणा को स्थापित नहीं किया जा सकता ?

सम्पादन समन्वय -यशवन्त माथुर 

(इस ब्लॉग पर प्रस्तुत आलेख लोगों की सहमति -असहमति पर निर्भर नहीं हैं -यहाँ ढोंग -पाखण्ड का प्रबल विरोध और उनका यथा शीघ्र उन्मूलन करने की अपेक्षा की जाती है)

Advertisements

15 comments on “मकर -संक्रांति का महत्त्व

  1. "आप सभी को मकर संक्रांति के पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ !"

  2. मकर संक्रांति के उपलक्ष में बहुत जानकारीपूर्ण लेख ।सही कहा आजकल दान देना भी एक रस्म बनकर ही रह गई है ।हमारे रीति रिवाज़ बहुत सोच समझ कर ही बनाये गए होंगे ।लोहड़ी , संक्रांति और पोंगल की शुभकामनायें ।

  3. @जाकिर जी,मैंने सिर्फ ब्लॉग के सम्पादन में मात्र समन्वय किया है.मूल पोस्ट पापा की ही है.सादर

  4. बहुत ही अच्छी जानकारी दी है.दान देने के महत्व और कारण को भी आप ने यहाँ अच्छे से समझाया.इस लेख में मिली जानकारीके अनुसार संक्रांति १५ को ही मनाएंगे.

  5. मकर सक्रांति के बारे में बहुत सुंदर जानकारी….. पावन पर्व की शुभकामनायें……

  6. nivedita says:

    ज्ञानवर्धक आलेख के लिये पिता – पुत्र दोनों को धन्यवाद । मकर सक्रांति पर्व आप सबको शुभ हो !

  7. nivedita says:

    ज्ञानवर्धक आलेख के लिये पिता – पुत्र को धन्यवाद ।इस पावन पर्व की आप सब को बधाई !

  8. dhanyvadmahatvpurn jankarimakarsankranti ki hardik subhkamnaye…

  9. माथुर साहब एवम् यशवंत जी… बहुत अच्छी शास्त्रीय जानकारी हमेशा यहाँ से मिलती है,और यह पोस्ट भी उसी की एक कड़ी है. आप सबों को भी इस पुनीत अवसर पर मेरी मंगलकामनाएँ!!

  10. boletobindas says:

    बेहतरीन लेख। मकर संक्रातिं की बधाई। दोनो लेख पढ़े, स्वामी विवेकानंद वाली भी। असल में सभी का अपहरण हो चुका है। धर्म के नाम पर मारकाट मचाना कुछ देशों की भी नीति बन चुकी है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के तालिबान नंबर एक हैं।

  11. सक्रांति …लोहड़ी और पोंगल….हमारे प्यारे-प्यारे त्योंहारों की शुभकामनायें……सादर

  12. आपको मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाये !

  13. Vijai Mathur says:

    सभीजनों को उनकी शुभकामनाओं हेतु धन्यवाद.रोहित जी ने जिन तालिबानियों,पाकिस्तान और अफगानिस्तान की चर्चा की है -वे सभी साम्राज्यवादी अमेरिका के पिटठू हैं .आतंकवाद का निर्यात अमेरिका ही करता है.खालिस्तान आंतक को भी अमेरिकी कैम्पों में प्रशिक्षण मिला था.याद रखिये पाकिस्तान और अफगानिस्तान की स्वतन्त्र विदेश नीति नहीं है.विवेकानंद जी वाली पोस्ट में आतंकवादी तालिबानियों का कहीं कोई ज़िक्र नहीं है ,फिर यह भटकाव कैसे हुआ;समझ से परे है.

  14. ‘‘दान देने का विधान बनाने का मूल उद्देश्य यह था कि जो साधन-विहीन हैं और आवश्यक पदार्थों का उपभोग करने में अक्षम हैं उन्हें भी स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ मिल सके।‘‘आपके इस विचार से पूरी तरह सहमत।अब दान वंचितों की सेवा न होकर कर्मकाण्ड और दिखावा हो गया है। ऐसे दान का कोई फल नहीं मिलेगा।ज्ञानवर्द्धक आलेख के लिए धन्यवाद, माथुर जी।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s