कम होते जीवन के दिन (भाग-२)


मनुष्य खुद ही अपने स्वास्थ्य को गिराने के लिए जिम्मेदार होता है.अक्सर जीवन-रेखा एवं मंगल रेखा से निकल कर हथेली की दूसरी ओर जाती हुई जो रेखाएं दिखाई पड़ती हैं वे असंयम व बदमिजाजी के कारण बिगड़े हुए खराब स्वास्थ्य का संकेत हैं.जिस व्यक्ति की हथेली में आधे भाग तक जीवन व मस्तिष्क रेखाएं एक-दुसरे को लगभग छूती  हुई सी दिखाए दें तो समझें इस तरह का व्यक्ति अत्यधिक संवेदनशील व शीघ्र उत्तेजित हो जाने वाला होता है.यदि जीवन-रेखा पतली व कमजोर लगती हो तो इस तरह का व्यक्ति छोटी-छोटी  बातों पर अत्यधिक चिंता करके अपना स्वास्थ्य ख़राब कर लेता है.ये लोग अत्यधिक डरपोक व जरूरत से ज्यादा सतर्कता बरतने वाले होते हैं,उनमें जीवन की सच्चाइयों का सामना करने का साहस नहीं होता.उसके विपरीत यदि जीवन व मस्तिष्क रेखाएं बस थोड़ी सी मिली हुई हों तो ऐसा व्यक्ति सतर्क व संवेदनशील तो होता है लेकिन बिना किसी कारण के नहीं.
कीरो लिखते हैं एक बार एक डरपोक किस्म के सज्जन जिनके पिता की मृत्यु हो चुकी थी और जो बहुत बड़ी फैक्टरी विरासत में छोड़ गए थे उनसे परामर्श लेने आये.उसकी हथेली में साफ़ था कि,उसकी चिंताओं के कारण शीघ्र ही उसका स्वास्थ्य खराब हो जाएगा अतः वह व्यवसाय न करे.वह सहमत था और धन्यवाद देकर चला गया.परन्तु एक वकील के परामर्श पर उसने व्यापार सम्हाल लिया और कीरो को पत्र लिख कर हस्त रेखा शास्त्र को ‘बकवास’ कहा.
इस घटना के बारह माह बाद कीरो को दूसरा पत्र भेज कर पूरी विनम्रता से उसने लिखा-“क्या आप एक ऐसे व्यक्ति से मिलना चाहेंगे ,जिसके जीवन के कुछ ही दिन शेष हैं. कीरो उसके अनुरोध को ठुकरा न सके और दिए गए पते पर नाइट्सब्रिज पहुंचे और एक सुन्दर कमरे में उसे तकियों के सहारे लेटे हुए पाया.उसने बहुत हल्की सी आवाज में कहा-“कीरो,यह आपकी विनम्रता है कि आपने यहाँ आने का कष्ट किया ,मैं जानता था कि आप   जरूर आयेंगे.मैंने आपकी बात नहीं मानी और मुझे उसका खामियाजा भुगतना पडा”
इसके तीन दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गई.कीरो का दृढ अभिमत है कि ,लापरवाही व अड़ियलपन के कारण वे दुर्घटनाएं हो जाती हैं जिन्हें चेतावनियों के प्रति ध्यान देने व सावधानियां बरतने से टाला जा सकता है.
जब जीवन-रेखा अंगूठे की जड़ में या शुक्र पर्वत पर उसे संक्रा बनाती हुई दिखाई दे तो शारीरिक या जीवन की शक्तियां कभी बलशाली नहीं होतीं.ऐसे लोगों के प्रेम-सम्बन्धों में उत्तेजना नहीं होती .जो लोग विवाहित होते हैं वे या तो संतान जनने में सक्षम नहीं होते या कभी-कभार मुश्किल से ही उनके बच्चे होते हैं.
यदि जीवन-रेखा से निकल कर एक रेखा पहली उंगली की जड़ की ओर जा रही हो तो यह एक महत्वाकांक्षी जीवन का प्रतीक है.यदि मस्तिष्क रेखा भी सीधी व स्पष्ट हो तो ऐसा व्यक्ति दूसरों के लिए नियम बनाएगा और उनको आदेश देगा.यदि यही विशेषताएं किसी औरत के हाथ में दिखाई दें तो समझिये कि उसके पति की खैर नहीं ,क्योंकि तब यह निश्चित है कि वह उस पर हुक्म चलायेगी ,उस पर अपने नियम-कायदे थोपेगी और अपने गर्म मिजाज स्वभाव के कारण उसकी नाक में डीएम किये रहेगी. 
अनुपम उदाहरण 
न्यूयार्क में एक लम्बा-  तगड़ा रोबीले हाव-भाव वाला एक आदमी अपने विवाह से ठीक एक दिन पहले कीरो के पास आया और अपनी मंगेतर का हाथ दिखाने ले गया जो दिखने में बहुत नाजुक मिजाज थी.परन्तु उसकी जीवन-रेखा तर्जनी की जड़ से प्रारम्भ थी जबकि उस व्यक्ति की अंगूठे की जड़ से.वह महिला बहुत सख्त मिजाज थी और अच्छों-अच्छों को अपना गुलाम बना सकती थी.
छः माह बाद जब कीरो फिर न्यूयार्क लौटे तो मुरझाया चेहरा लेकर वह व्यक्ति उनसे मिला और बोला-“कीरो,आपने ठीक ही कहा था कि मेरी इच्छाशक्ति कमजोर है .मैंने कभी यह सोचा भी न था कि मुझे किसी औरत के सामने इस तरह झुकना पड़ेगा और वह भी किसी ऐसी दुबली-पतली औरत के सामने.”वह बोलता गया-एक लम्बी आह लेकर -“हुक्म! वह तो मुझ पर राज करती है कीरो,मैं अपनी इच्छा से अपने ही घर में कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र नहीं.मेरी हैसियत तो एक मामूली कीड़े जैसी है.सबसे खराब बात तो यह है कि यह बात मेरे सारे पडौसी भी जानते हैं और मेरा मजाक उड़ाते हैं.”
कीरो लिखते हैं अब वह इस समय क्या कहते दोनों की जीवन-रेखाएं तो झूठी नहीं थीं.जब चेताया तो माने नही.
अपने अहम् के कारण अक्सर लोग सत्परामर्श को स्वीकार नहीं करते है जबकि ठगी की लुभावनी बातें उन्हें खूब भाती हैं.फिर तो –
“पाछे पछताए होत क्या? जब चिड़ियाँ चुग गयीं खेत” 
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4 comments on “कम होते जीवन के दिन (भाग-२)

  1. ज्ञानवर्धक लेख जो बहुत काम आयेगा।

  2. गहन चिन्तनयुक्त विचारणीय लेख …..साथ में गायत्री मंत्र…अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई तथा शुभकामनाएं !

  3. वीना says:

    बहुत अच्छी जानकारी मिली…बढ़िया आलेख….

  4. अच्छी जानकारी देता लेख …..

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