पास्को का विरोध जायज है


‘Hindustan-Lucknow-2 0/06/2011-Page-14

कोरिया की ‘पोहांग आयरन एंड स्टील कं.’को ५० हजार करोड़ रूपये से भी अधिक निवेश से उडीसा के जगत सिंह पुर  जिले में महानदी डेल्टा की उपजाऊभूमि  में इस्पात  कारखाना खोलने की इजाजत नियमों एवं कानूनों का उल्लंघन करके दे दी गयी है. इसके विरोध में अभय साहू के नेत्रित्व में पिछले छः वर्षों से ‘पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति’के तत्वावधान में सशक्त जन-आन्दोलन चल रहा है.लेकिन केंद्र तथा उड़ीसा की सरकारें इसकी परवाह किये बगैर विदेशी कं. के हित में कार्य कर रही हैं.  

कहा जाता है कि,यह परियोजना भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की अनेक जानी-मानी परियोजनाओं की कुल उत्पादन क्षमता के मुकाबले भी बहुत अधिक १२० लाख टन वार्षिक इस्पात  का उत्पादन करने वाली है.अंतर राष्ट्रीय बाजार में लौह अयस्क की कीमतें बढी हुयी हैं लेकिन इस कं. को सस्ती दर पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है.एक ही स्थान पर बेहद अधिक लौह अयस्क जमा करने से पर्यावरण पर भारी विपरीत प्रभाव पड़ेगा.यह बेहद उपजाऊ भूमि है इसके छिनने से खेती,वन,पशु-पालन आदि पर आधारित आजीविकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है.जितना रोजगार यह परियोजना उपलब्ध करायेगी उससे कहीं अधिक टिकाऊ आजीविका की क्षति होगी.

जगतसिंह पुर जिले के गोबिंदपुर गाँव में ३०० मासूम बच्चे ६०० लाठी,डंडों और मशीनगन से लैस पुलिस  जवानों के समक्ष अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए डटे हुए हैं.ग्रामीणों के साथ महिलाओं और बच्चों का यह सहयोग ‘लव-कुश /राम संगर्ष ‘की याद दिलाता है.तब वाल्मीकि मुनि की रण-नीति के अनुसार ऐसा करके लव-कुश ने राम पर विजय प्राप्त की थी.आज अब देखना है कल-युग में महिलायें और बच्चे कितनी जीत प्राप्त कर सकते हैं.भारत के नागरिक होने के नाते हम सब का यह पुनीत कर्तव्य है कि,हम सब उड़ीसा की जनता के साथ अपनी एकजुटता का सन्देश सरकार को दें.आज पूरे देश में ‘पास्को विरोधी दिवस’मनाया जा रहा है -हम उत्तर-प्रदेश वासी तहेदिल से अपने उडिया बंधुओं के साथ हैं.हम उड़ीसा और केंद्र की सरकारों से यह मांग करते हैं कि तत्काल प्रभाव से पास्को कं. को गलत ढंग से दिया गया आदेश रद्द किया जाए और किसानों की उपजाऊ भूमि को उनसे न छीना जाए.

ममता बैनर्जी सहयोग दें

प.बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बैनर्जी ने सिंगूर और नंदीग्राम में देश की टाटा कं.को कारखाना नहीं खोलने दिया तथा किसानों की जमीन वापिस करा रही हैं.इसी प्रकार उन्हें अपने पडौसी राज्य उडीसा की ग्रामीण जनता के हक़ में वहां के मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक को समझाना चाहिए.यदि वह ऐसा नहीं करती हैं तो यह समझा जाना चाहिए कि ,ममता जी केवल बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के लिए किसान-हितैषी होने का स्वांग कर रही थीं वस्तुतः वह कुर्सीवादी हैं और किसान-हितैषी नहीं.

नवीन पटनायक राष्ट्रभक्ति का परिचय दें

उडीसा के मुख्यमंत्री नवीन जी के पिता श्री विजयेन्द्र (उर्फ़ बीजू)पटनायक ने उस वक्त असीम राष्ट्र भक्ति का परिचय दिया था जब काश्मीर पर पकिस्तान का कबाइली हमला हुआ था.बीजू पटनायक जी विमान चलाना जानते थे और कांग्रेसी नेता थे.तत्कालीन केन्द्रीय खाद्य  मंत्री रफ़ी अहमद किदवई साहब के भाई जो तब गृह मंत्रालय में सचिव थे को लेकर बीजू साहब विमान से श्रीनगर पहुंचे थे और राजा हरी सिंह के साथ भारत में विलय का समझौता कराया था.उन्हीं के पुत्र हैं नवीन पटनायक जी अतः उनसे अपेक्षा है कि अपने पिता की
भांति राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए पास्को से किये गए समझौते को रद्द करने में सक्रीय कदम उठायें तथा –

निरीह किसानों की आजीविका का साधन उनकी उपजाऊ जमीने न छीनें.

यह क्षेत्र देश की सीमा की सुरक्षा की दृष्टि से भी विदेशी कं. के पास नहीं जाना चाहिए ,अतः समस्त देशवासियों से आग्रह है कि वे उड़ीसा की जनता के साथ एकजुटता बनाएं और सरकार को देश-हित में कदम उठाने पर बाध्य कर दें.

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4 comments on “पास्को का विरोध जायज है

  1. एक नई जानकारी मेरे लिए।

  2. महत्वपूर्ण जानकारी…

  3. बिल्कुल नई जानकारी देती पोस्ट…आभार

  4. dipakkumar says:

    nice information hamare blog me bhi aaye yaha bhi aaye

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