उत्तर प्रदेश भाकपा का चुनाव घोषणा पत्र


सब को देखा!      खाया धोखा !!

भा .क .पा .को ! दो अब मौका !!


भ्रष्टाचार से मुक्त पार्टी 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 
लखनऊ 21 जनवरी। भ्रष्टाचार, महंगाई और अपराधों पर अंकुश तथा उत्तर प्रदेश एवं उसकी जनता के चौतरफा विकास पर केन्द्रित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का चुनाव घोषणापत्र आज जारी कर दिया गया। घोषणा पत्र में जनता से अपेक्षा की गयी है कि वह 16वीं विधान सभा में भाकपा और अन्य वामपंथी दलों की मजबूत उपस्थिति को दर्ज कराये; बड़ी संख्या में भाकपा प्रत्याशियों को जितायें; साम्प्रदायिक, जातिवादी एवं वंशवादी ताकतों को परास्त करे; भ्रष्ट, अपराधी एवं माफिया सरगनाओं को विधान सभा में पहुंचने से रोके तथा किसान, मजदूर एवं आम आदमी की बर्बादी का कारण – ”आर्थिक नवउदारवाद की नीतियों“ को पीछे धकेले। 

मतदाताओं से अपेक्षा

चुनाव घोषणापत्र की भूमिका में प्रदेश की जनता से वर्तमान चुनाव को स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक परिवर्तनकारी, महत्वपूर्ण और निर्णायक चुनाव साबित करने का आह्वान करते हुए अपेक्षा की गयी है कि मतदाता जाति-पांति, धार्मिक और क्षेत्रीय संकीर्णताओं से बाहर निकल कर अपने बदतर हालातों पर गौर करे; चुनावों के दौरान अपनाये जाने वाले भ्रष्ट तौर-तरीकों से प्रभावित न हांे और अपने तथा प्रदेश एवं देश के हितों को ध्यान में रखकर अपने मताधिकार का प्रयोग करे।

गरीब वर्ग को जातियों में बांट कर अमीर वर्ग अपनी सत्ता को बरकरार रखना चाहता है ताकि उसकी ”आम आदमी“ को लूटने वाली आर्थिक नीतियां निर्बाध चलती रहें।
घोषणापत्र में विगत समय में प्रदेश की चारों प्रमुख पार्टियों के शासन कालों का खुलासा करते हुए उन्हें भ्रष्टाचार, बढ़ती महंगाई और बढ़ते अपराधों के साथ-साथ जनता की बदहाली का जिम्मेदार बताया गया है। संप्रग-1 सरकार को वामपंथ के समर्थन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि जनता के तमाम तबकों ने इस बात का नोटिस लिया है कि संप्रग-1 सरकार पर वामपंथ के दवाब के कारण जहां एक ओर ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून तथा सूचना के अधिकार का कानून बना था वहीं दूसरी ओर महंगाई पर अंकुश लगा रहा था। राजनीतिक भ्रष्टाचार फल-फूल नहीं सका था और केन्द्र सरकार जनविरोधी आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ा नहीं सकी थी। घोषणापत्र में कहा गया है कि लोकसभा में वामपंथ की ताकत में ह्रास का परिणाम आज सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेशीकरण, महंगाई और भ्रष्टाचार के रूप में आम जनता के सामने है।
घोषणापत्र में जनता के तमाम तबकों के बारे में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दृष्टिकोण को रखा गया है और इसमें समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों के लिए वायदे किये गये हैं।

विद्यार्थियों-नौजवानों हेतु 


दोहरी शिक्षा प्रणाली की समाप्ति, शिक्षा का राष्ट्रीयकरण, रोजगार उन्मुख शिक्षा की निःशुल्क व्यवस्था तथा मनरेगा के समकक्ष योजना शहरी क्षेत्रों के लिए तैयार करने की बात की गयी है तो दूसरी ओर वित्तविहीन विद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षको के वेतन का सरकारी खजाने से भुगतान तथा शिक्षा-मित्रों, मध्यान्ह भोजन रसोईया, आशा बहुओं, आंगनबाड़ी कर्मचारियों की सेवाओं के नियमितीकरण एवं वेतन भुगतान की बात की गयी है।
घोषणापत्र में भाकपा ने महिलाओं के लिए संसद एवं विधान मंडलों में एक तिहाई आरक्षण के कानून की बात को दोहराया गया है तो अल्पसंख्यकों के बारे में रंगनाथ मिश्र आयोग और सच्चर कमेटी की अनुशंसाओं को लागू करने तथा अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी जाति के मामलों में धार्मिक भेदभाव की समाप्ति की बात कही गयी है।
महिलाओं एवं मजदूरों हेतु 

घोषणापत्र में किसानों द्वारा खेती में प्रयुक्त सामग्रियों – खाद, बीज, पानी, डीजल आदि की कीमतों में कटौती, 4 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज मुहैया कराने तथा कृषि उत्पादों को लाभ पर बेचने की गारंटी की बात शामिल है। ठेका प्रथा एवं आउटसोर्सिंग को समाप्त करने की बात करते हुए मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी के स्तर को जीने लायक मजदूरी के स्तर तक ऊपर उठाने की बात की गयी है तथा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कानून बनाने की बात भी दोहराई गयी है।

 यू. पी. हैण्डलूम कारपोरेशन तथा बंद कताई मिलों को चालू करने के साथ-साथ रियायती दर पर बिजली और सूत मुहैया कराने तथा हथकरघा वस्त्रों तथा दस्तकारों के उत्पादों के निर्यात के लिए आधारभूत ढांचा विकसित करने की बात कही गयी है। बेरोजगार हुए मजदूरों का जिक्र करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र एवं सहकारी क्षेत्र के बंद पड़े कारखानों को दुबारा चालू करने की बात की गयी है। घोषणापत्र में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की निःशुल्क व्यवस्था तथा सभी अस्पतालों में सुविधाओं को बढ़ाने की बात की गयी है।

संसदीय लोकतन्त्र की मजबूती 

भाकपा ने विधान सभा एवं विधान परिषद की साल भर में कम से कम 100 दिनों तक बैठक के आयोजन को सुनिश्चित करने की बात कहते हुए जोर दिया है कि जनमानस पर व्यापक प्रभाव डालने वाले नीतिगत फैसलों पर विधायिका की मुहर को आवश्यक किया जायेगा। साथ ही भ्रष्टाचार में डूबी सांसद एवं विधायक निधियों को समाप्त करने पर बल दिया गया है।
घोषणापत्र में आवास के अधिकार को संवैधानिक अधिकार बनाने तथा पिछली सरकारों द्वारा सरमायेदारों को सौंपी गयी सार्वजनिक एवं सहकारी क्षेत्र की परिसम्पत्तियों का राष्ट्रीयकरण करने, वृद्धावस्था, विधवा एवं विकलांग पेंशन को सभी पात्र व्यक्तियों को मुहैया कराना तथा इन योजनाओं में पात्रता की परिभाषा बदलने की बात की गयी है।

भ्रष्टाचार उन्मूलन 

1-प्रभावी लोकपाल के प्रति भाकपा की प्रतिबद्धता प्रकट की गई है। 

2-जांच से लेकर मुकदमा चलाने तक सी बी आई सहित सभी जांच एजेंसियों को कार्यगत स्वतन्त्रता मुहैया करना। 

3-सी बी आई की तरह एक स्वतंत्र जांच एजेंसी का प्रदेश स्तर पर गठन। 

4-सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती से त्वरित कार्यवाही। 

5-भ्रष्टाचार के मुकदमों के त्वरित निस्तारण हेतु विशेष न्यायालयों का गठन। 

6-जन-धन के सभी उपयोगों की स्वतंत्र एजेंसी से आदित आवश्यक करना। 

7-सामाजिक कल्याण योजनाओं के सोशल आदित की व्यवस्था। 

8-राजनीतिक भ्रष्टाचार की जड़ ‘सांसद एवं विधायक निधि’ को समाप्त करना। 

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