पूनम की दो कवितायें(2)


(1)
‘खेल’

पुरुष और प्रकृति का
मेल बड़ा अनमोल
हमारे पूर्वज बताते हैं
इसका इतिहास-भूगोल।

प्रकृति को मिटाने का
मतलब है बेमेल
एक दिन ऐसा होगा
पुरुष भी खत्म हो जाएगा
कैसा है यह संसार का खेल?
            *

‘समकोण’

पुरुष दबाता है
दबती है नारी
पुरुष पैर दबवाता है
दबाती है नारी।

पुरुष और नारी
आधार और लम्ब हैं
इसको  न बिगाड़ो
समकोण को अधिक कोण
या न्यून कोण न बनाओ।

(1-कन्या भ्रूण हत्याओं पर चिंता एवं2-स्त्री उत्पीड़न का रेखांकन —पूनम माथुर)
        *

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