भगवान को बचाओ


हिंदुस्तान-लखनऊ-26/03/2012 

 प्रसन्न प्रांजल साहब द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की स्कैन मे आप साफ-साफ देख रहे हैं कि वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है -“जल,वायु,आकाश,प्रथिवी और अग्नि (ऊर्जा )इन्हीं पाँच तत्वों से बनी है प्रकृति और मानव शरीर। आज जरूरत इन तत्वों के संरक्षण और संतुलन की है। “

इसी बात को इसी ब्लाग मे कई बार लगातार मै भी स्पष्ट कर चुका हूँ। वैज्ञानिकों द्वारा स्वीकृत इन पाँच तत्वों का समन्वय ही तो भगवान है। –

भ =भूमि अर्थात प्रथिवी।
ग = गगन अर्थात आकाश।
व = वायु ।
I=अनल अर्थात अग्नि ( ऊर्जा )।
न =नीर अर्थात जल ।

इन पाँच तत्वों के प्रथमाक्षर भ +ग +व +I +न  मिल कर ही तो भगवान हुये। चूंकि इन्हें किसी प्राणी ने बनाया नहीं है ये खुद ही बने हैं इसीलिए ‘खुदा’ हैं। ये पाँच तत्व ही प्रत्येक प्राणी और वनस्पति की उत्पत्ति (Generate),स्थिति (Operate)और संहार (Destroy) करने के कारण ही GOD कहलाते हैं।

लेकिन आप आज क्या देखते हैं कि पाखंडी-ढ़ोंगी-पुरोहितों ने भगवान,खुदा,GOD तीन अलग -अलग गढ़ डाले हैं और उनके नाम पर एक इंसान दूसरे इंसान के खून का प्यासा बना हुआ है। अनपढ़ गवारों की बात तो अलग है लेकिन पढे-लिखे उच्चाधिकारी भी जो अन्ना /रामदे

व,आशा राम बापू,मुरारी बापू,बाल योगेश्वर,आनंद मूर्ती,रवी शंकर आदि ढेरों ढोंगियों के चेले कहलाने मे गौरव की अनुभूति करते हैं। बड़े फख्र के साथ कहते हैं कि -“अन्ना के पीछे नहीं भागें तो किसके पीछे भागें। ” अपने पाखंड का सार्वजनिक प्रदर्शन करके औरों को गुमराह करते हैं और और लोग भी उनका अंधानुकरण करने मे अपने को धन्य समझते हैं।

जो भगवान-खुदा-GOD समस्त प्रकृति का नियंता है उसकी रक्षा करने -बचाने -संरक्षण करने की बजाए ये लोग उसे और नष्ट करने पर तुले हुये हैं। अपने समान दूसरे इंसान द्वारा बनाए हुये चित्र या मूर्ती को धूप-दीप दिखा कर यह भगवान की पूजा करने का स्वांग करते हैं जबकि इससे पर्यावरण और प्रदूषित होकर भगवान के अस्तित्व को ही खतरा इन लोगों द्वारा खड़ा किया जा रहा है। यदि भगवान ही न बचेगा तो यह सृष्टि स्वतः ही नष्ट हो जाएगी।

केवल हम ही नहीं प्रबुद्ध वैज्ञानिक भी भगवान को बचाने की गुहार कर रहे हैं। भगवान को बचाने का एकमात्र हल हमारी प्राचीन ‘हवन’ पद्धति को बहाल करना ही है। वैसे तो इसी ब्लाग मे विस्तृत उल्लेख पहले से ही इस संबंध मे किया जा चुका है किन्तु आगामी पोस्ट मे एक बार फिर इसके महत्व को बताने का प्रयास किया जाएगा।

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