ज्योतिष और अंधविश्वास (पुनर्प्रकाशन)


शनिवार, 4 दिसम्बर 2010

ज्योतिष और अंधविश्वास

पिछले कई अंकों में आपने जाना कि,ज्योतिष व्यक्ति क़े जन्मकालीन ग्रह -नक्षत्रों क़े आधार पर भविष्य कथन करने वाला विज्ञान है और यह कि ज्योतिष कर्मवादी बनाता है -भाग्यवादी नहीं. इस अंक में आप जानेंगे कि ,अंधविश्वास ,ढोंग व पाखण्ड का ज्योतिष से कोई सरोकार नहीं है.

कुछ निहित स्वार्थी तत्वों ने ज्योतिष -विज्ञान का दुरूपयोग करते हुए इसे जनता को उलटे उस्तरे से मूढ्ने का साधन बना डाला है.वे लोग भोले -भाले एवं धर्म -भीरू लोगों को गुमराह करके उनका मनोवैज्ञानिक ढंग से दोहन करते हैं और उन्हें भटका देते हैं.इस प्रकार पीड़ित व्यक्ति ज्योतिष को अंधविश्वास मानने लगता है और इससे घृणा करनी शुरू कर देता है.ज्योतिष -ज्ञान क़े आधार पर होने वाले लाभों से वंचित रह कर ऐसा प्राणी घोर भाग्यवादी बन जाता है और कर्म विहीन रह कर भगवान् को कोसता रहता है.कभी -कभी कुछ लोग ऐसे गलत लोगों क़े चक्रव्यूह में फंस जाते हैं जिनके लिए ज्योतिष गम्भीर विषय न हो कर लोगों को मूढ्ने का साधन मात्र होता है.इसी प्रकार कुछ कर्मकांडी भी कभी -कभी ज्योतिष में दखल देते हुए लोगों को ठग लेते हैं.साधारण जनता एक ज्योतषीऔर ढोंगी कर्मकांडी में विभेद नहीं करती और दोनों को एक ही पलड़े पर रख देती है .इससे ज्योतिष विद्या क़े प्रति अनास्था और अश्रद्धा उत्पन्न होती है और गलतफहमी में लोग ज्योतिष को अंध -विश्वास फ़ैलाने का हथियार मान बैठते हैं .जब कि सच्चाई इसके विपरीत है.मानव जीवन को सुन्दर,सुखद और समृद्ध बनाना ही वस्तुतः ज्योतिष का अभीष्ट है

७ वर्ष पूर्व २००३ ई .क़े नवरात्रों में एक ढोंगी व पाखंडी कर्मकांडी द्वारा कमला नगर ,आगरा निवासी एक व्यवसायी की माता की निर्मम हत्या व लूट -पाट तथा उसकी पत्नी को घायल कर दिया गया.पुलिस प्रशासन द्वारा पाखंडी को बचाने हेतु नाटक रचा गया और पीड़ित परिवार का चरित्र हनन किया गया.इस हरकत की जनता में उग्र प्रतिक्रिया हुई .फलस्वरूप दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित होना पड़ा.इतने वीभत्स और कारुणिक काण्ड पर एक प्रतिष्ठित मिशनरी विद्द्यालय क़े प्रतिष्ठित शिक्षक की प्रतिक्रिया थी कि,उस कर्मकांडी क़े बयान में कुछ सच्चाई है और कि पुलिस अधिकारी निष्पक्ष व ईमानदार हैं.क्या आप जानना चाहेंगे कि,एक तथा -कथित सभ्रांत शिक्षक क़े ऐसे उदगार क्यों हैं ?नितांत आर्थिक आधार.अतीत में कभी पीड़ित परिवार का कोई बच्चा उक्त शिक्षक से पंद्रह दिन ट्यूशन पढ़ा था और बाद में उनका पारिश्रमिक भुगतान इसलिए नहीं किया गया था कि,उस बच्चे पर कोई तवज्जो नहीं दी गई थी .बस इतने मात्र से उक्त पीडिता को दोषी कहने में इन शिक्क्षक महोदय ने कोई संकोच नहीं किया .
आइये ,इन शिक्षक महोदय की ऐसी सोच का ज्योतिषीय विश्लेषण करें.यह शिक्षक एक ऐसे सम्प्रदाय (गायत्री परिवार )क़े अनुयायी हैं जो ज्योतिष को अन्धविश्वासी मानता है और इसी कारण इन महोदय ने अपने आवास पर इस प्रकार निर्माण -परिवर्तन कराया है जो ज्योतिष और वास्तु क़े विपरीत है.वास्तु ज्योतिष का ही एक अंग है और ग्रह नक्षत्रों की स्थिति क़े आधार पर गृह -निर्माण की विधि बताता है.संदर्भित शिक्षक महोदय ने अपने आवास क़े ईशान में दोनों मंजिलों पर शौचालय निर्मित करा लिए;उत्तर दिशा में रसोई स्थानांतरित कर ली ,जो कि वास्तु -शास्त्र क़े अनुसार (दोनों कृत्य) बुद्धि -विपर्याय क़े सूचक हैं.ईशान दिशा बृहस्पति का क्षेत्र है जो कि ज्ञान -विज्ञान ,बुद्धि -प्रदाता ग्रह है.इस क्षेत्र को नियमानुसार खाली या हल्का रखते हैं अथवा पूजा -स्थल का वहां निर्माण कराते हैं.जिससे बुद्धि व ज्ञान का संचार सुचारू रूप से होता रहे.प्रस्तुत उदाहरण में शिक्षक महोदय ने ज्ञान क़े देवता को (शौचालय निर्मित कर ) मल -मूत्र से आवृत करके अपनी बुद्धि पर कुठाराघात कर लिया और इस अंध विश्वास से ग्रस्त हैं कि ,ज्योतिष ही अंध विश्वास का वाहक है.इस निर्माण कार्य को ७ वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और वहां बुद्धि -विभ्रम का बहुत कुछ खेल हो चुका है (जिसका वर्णन वास्तु दोष एक प्रेक्टिकल उदाहरण में भी हुआ है और "श्रधा ,विश्वास और ज्योतिष "में भी आगे होगा ).

अब आइये ,इन्हीं की तर्ज़ पर हू -ब -हू निर्मित एक पुलिस अधिकारी क़े आवास से इस वास्तु दोष को समझते हैं,जिनके निर्माण काल को अब ११ वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और उस भवन क़े निवासियों पर समस्त वास्तु दोष सिर पर चढ़ कर बोल रहे हैं.उत्तर की रसोई और ईशान क़े दोनों मंजिलों वाले शौचालय युक्त आवास क़े निवासी पुलिस अधिकारी पब्लिक में तो सौम्य व विनम्र अधिकारी क़े रूप में जाने जाते हैं (अब रिटायर्ड ),परन्तु घर में अब उनका नियंत्रण समाप्त हो गया है.उनके बेटे -बेटियां पिता को कुछ समझते ही नहीं हैं और कहते हैं कि ,पुलिसिया डंडा घर में नहीं चलेगा. इनकी पत्नी इन्हें देखते ही गुर्राने लगती हैं.अधिकारी महोदय भी अपनी शिक्षिका पत्नी को कुछ महत्त्व नहीं देते हैं.फलतः इनका घर भानुमती का कुनबा बनकर रह गया है. इस ईशान -दोष ने बेटे -बेटियों क़े विवाह में अनावश्यक बाधाएं खडी कीं (गुण मिल जाने क़े बावजूद लड़के वाले बाद में बिदक जाते थे और कभी इन्ही क़े किसी रिश्तेदार की बेटी से विवाह करके इन अधिकारी महोदय को धोखा खिला देते थे;उपाए करने क़े बाद ही उन बच्चों का विवाह हो सका ).यही नहीं ,इस ईशान -दोष ने अधिकारी महोदय को रक्त -चाप का मरीज़ बना कर रख दिया है.घर में घुसते ही यह चिडचिडे बन जाते हैं.इनकी शिक्षिका पत्नी को गठिया रोग ने घेर लिया है और अब घर क़े कार्यों से भी लाचार हो गई हैं और पुत्रियों फिर बहुओं पर निर्भर होकर रह गई हैं.इस परिवार की बुद्धि इतनी विकृत हो गई है कि,किसी भी प्रकार का उपचार व निराकरण भी सम्यक रूप से करने को कोई तैयार नहीं है और अपनी अकर्मण्यता को छिपाने हेतु भगवान् की मर्जी को ढाल बना लेते हैं.

"अंधविश्वास "से ग्रस्त लोग ज्योतिष और वास्तु को ठुकरा कर किस प्रकार अपना अहित कर लेते हैं,इसका एक और उदाहरण उक्त शिक्षक महोदय क़े सलाहकारों पर एक नज़र डालने से मिल जाएगा .इनके एक सलाहकार बचपन क़े सहपाठी और
अब दूरसंचार अधिकारी कहते हैं कि,आज विज्ञान क़े युग में ज्योतिष को केवल मूर्ख -लोग ही मानते हैं.(उन्हीं महोदय को अपनी पुत्री नीलम क़े विवाह की अडचने दूर करने हेतु मेरा परामर्श मानने पर मजबूर होना पड़ा और समुचित उपाय करने क़े बाद ही उसका विवाह सम्पन्न हो सका )
.इनके दूसरे सलाहकार चुनावों में परास्त एक छुट -भैय्ये नेता का कहना है-भाग्य में जो होना है वह हो कर रहता है और ज्योतिष का कोई लाभ नहीं है.उनके अपने निवास में जो वास्तु दोष हैं उनका उपचार वह करना नहीं चाहते और बेटे -बेटियों की बढ़ती उम्र क़े बावजूद शादी न होने से हताश हैं और भगवान् को कोसते रहते हैं. "ऐसे अन्धविश्वासी लोगों क़े लिए बस यही कहा जा सकता है -जो होना है ,सो होना है.फिर किस बात का रोना है.."

ज्योतिष को अंधविश्वास का प्रतीक मानने वाली एक महिला राजनेता का रसोई घर तो पहले से ही द.-प .(S .W .)में था जो कलह की जड़ था ही;अब उसी क्षेत्र में नल -कूप भी लगवा लिया है.परिणामस्वरूप पहली छमाही क़े भीतर ही ज्येष्ठ पुत्र को आपरेशन का शिकार होना पड़ गया.

इसी प्रकार कान्वेंट शिक्षा प्राप्त लोग प्रतीक चिन्हों का उपहास उड़ाते हैं जबकि छोटा सा चिन्ह भी गूढ़ वैज्ञानिक रहस्यों को समेटे हुए है.उदाहरण स्वरूप इस स्वास्तिक चिन्ह को देखें और इस मन्त्र का अवलोकन करें :-
(कृपया स्कैन को इनलार्ज कर पढ़ें इसी आलेख का भाग है )

Picture+154.jpg

१ .चित्रा-२७ नक्षत्रों में मध्यवर्ती तारा है जिसका स्वामी इंद्र है ,वही इस मन्त्र में प्रथम निर्दिष्ट है.
२ .रेवती -चित्रा क़े ठीक अर्ध समानांतर १८० डिग्री पर स्थित है जिसका देवता पूषा है.नक्षत्र विभाग में अंतिम नक्षत्र होने क़े कारण इसे मन्त्र में विश्ववेदाः (सर्वज्ञान युक्त )कहा गया है.
३ .श्रवण -मध्य से प्रायः चतुर्थांश ९० डिग्री की दूरी पर तीन ताराओं से युक्त है.इसे इस मन्त्र में तार्क्ष्य (गरुण )है.
४ .पुष्य -इसके अर्धांतर पर तथा रेवती से चतुर्थांश ९० डिग्री की दूरी पर पुष्य नक्षत्र है जिसका स्वामी बृहस्पति है जो मन्त्र क़े पाद में निर्दिष्ट हुआ है.

इस प्रकार हम देखते हैं कि धार्मिक अनुष्ठानों में स्वास्तिक निर्माण व स्वस्ति मन्त्र का वाचन पूर्णतयः ज्योतिष -सम्मत है.धर्म का अर्थ ही धारण करना है अर्थात ज्ञान को धारण करने वाली प्रक्रिया ही धर्म है.इस छोटे से स्वस्ति -चिन्ह और छोटे से मन्त्र द्वारा सम्पूर्ण खगोल का खाका खींच दिया जाता है. अब जो लोग इन्हें अंधविश्वास कह कर इनका उपहास उड़ाते हैं वस्तुतः वे स्वंय ही अन्धविश्वासी लोग ही हैं जो ज्ञान (Knowledge ) को धारण नहीं करना चाहते.अविवेकी मनुष्य इस संसार में आकर स्वम्यवाद अर्थात अहंकार से ग्रस्त हो जाते हैं.अपने पूर्व -संचित संस्कारों अर्थात प्रारब्ध में मिले कर्मों क़े फलस्वरूप जो प्रगति प्राप्त कर लेते हैं उसे भाग्य का फल मान कर भाग्यवादी बन जाते हैं और अपने भाग्य क़े अहंकार से ग्रसित हो कर अंधविश्वास पाल लेते हैं.उन्हें यह अंधविश्वास हो जाता है कि वह जो कुछ हैं अपने भाग्य क़े बलबूते हैं और उन्हें अब किसी ज्ञान को धारण करने की आवश्यकता नहीं है.जबकि यह संसार एक पाठशाला है और यहाँ निरंतर ज्ञान की शिक्षा चलती ही रहती है.जो विपत्ति का सामना करके आगे बढ़ जाते हैं ,वे एक न एक दिन सफलता का वरन कर ही लेते हैं.जो अहंकार से ग्रसित होकर ज्ञान को ठुकरा देते हैं,अन्धविश्वासी रह जाते हैं.ज्योतिष वह विज्ञान है जो मनुष्य क़े अंधविश्वास रूपी अन्धकार का हरण करके ज्ञान का प्रकाश करता है.

शक ओ शुबहा -अब सवाल उस संदेह का है जो विद्व जन व्यक्त करते हैं ,उसके लिए वे स्वंय ज़िम्मेदार हैं कि वे अज्ञानी और ठग व लुटेरों क़े पास जाते ही क्यों हैं ? क्यों नहीं वे शुद्ध -वैज्ञानिक आधार पर चलने वाले ज्योत्षी से सम्पर्क करते? याद रखें ज्योतिष -कर्मकांड नहीं है,अतः कर्मकांडी से ज्योतिष संबंधी सलाह लेते ही क्यों है ? जो स्वंय भटकते हैं ,उन्हें ज्योतिष -विज्ञान की आलोचना करने का किसी भी प्रकार हक नहीं है. ज्योतिष भाग्य पर नहीं कर्म और केवल कर्म पर ही आधारित शास्त्र है.

(इस ब्लॉग पर प्रस्तुत आलेख लोगों की सहमति -असहमति पर निर्भर नहीं हैं -यहाँ ढोंग -पाखण्ड का प्रबल विरोध और उनका यथा शीघ्र उन्मूलन करने की अपेक्षा की जाती है)

Posted by विजय राज बली माथुर at 4.12.10 इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! Twitter पर साझा करेंFacebook पर साझा करें

5 टिप्‍पणियां:

  1. 006.JPG
    मनोज कुमार4 दिसम्बर 2010 5:25 pm
    बहुत ही तार्किक ढंग से आपने बात रखी है। अच्छी पोस्ट।
  2. Zpcksrd%255B1%255D.jpg
    VIJAY KUMAR VERMA4 दिसम्बर 2010 6:10 pm
    बहुत ही अच्छी जानकारी मिली
  3. DSC00347.JPG
    डॉ टी एस दराल4 दिसम्बर 2010 6:40 pm
    ज्योतिष के बारे में आपने बड़ी गूढ़ बातें बताई हैं ।
    इस निष्पक्ष लेखन के लिए बधाई ।
  4. Scanned%25252Bat%25252B26-11-2010%25252B21-00%25252B%252525282%25252529%25252B002312.jpg
    केवल राम4 दिसम्बर 2010 11:13 pm
    बहुत पुख्ता जानकारी है …….शुक्रिया
  5. arvind.jpg
    अरविन्द जांगिड5 दिसम्बर 2010 10:21 am
    सार्थक एंव उपयोगी जानकारी,
    आपका आभार,

    नोट-

    ज्योतिष संबन्धित इन लेखों के पुनर्प्रकाशन की श्रंखला इसलिए शुरू की गई है क्योंकि ‘रेखा’ के राजनीति मे आने संबंधी मेरे विश्लेषण के 26 अप्रैल 2012 को सही सिद्ध होते ही 27-04-2012 को IBN 7 के एक कर्मचारी ब्लागर ने ‘ज्योतिष’ ,’हवन’ आदि का मखौल उड़ाना और अपने पिछलग्गुओं से मेरे विरुद्ध प्रचार कराया जा रहा है। पढ़ने वाले ही यह निर्णय करें कि मेरा लेखन कितना गलत है?जैसा कि कारपोरेट पोंगापंथी कह रहे हैं।

Advertisements

2 comments on “ज्योतिष और अंधविश्वास (पुनर्प्रकाशन)

  1. सार्थक जानकारी …कई भ्रम दूर करती हुयी….

  2. Trupti says:

    बहुत अच्छी जानकारी … आपका चिन्मयी के ब्लॉग पर टीप्पनिके तर्थ सुझाव के लिए धन्यवाद !

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s