क्रांति स्वर प्रेरक एवं सम्मानीय बालिक ा —विजय राजबली माथुर


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यह हैं कु.अंशु सुपुत्री श्री प्रांशु मिश्रा। अंशु अभी चार वर्ष पूर्ण कर पांचवें वर्ष में चल रही हैं और ‘ला मार्टीनियर कालेज’ की ‘प्रीपेटरी’ कक्षा की छात्रा हैं। अंशु के दादाजी कामरेड अशोक मिश्रा जी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में राष्ट्रीय -स्तर के जाने-माने वरिष्ठ नेता हैं और उत्तर प्रदेश भाकपा के राज्य सचिव भी रह चुके हैं। अंशु की दादी जी कामरेड आशा मिश्रा जी भी पार्टी की राष्ट्रीय -स्तर की नेत्री हैं जो ‘महिला फेडरेशन’, उत्तर प्रदेश की महासचिव भी हैं।

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‘अमर उजाला’ सिटी परिशिष्ठ ,लखनऊ-5 जून,2013

उपरोक्त चित्र में अग्रिम पंक्ति में बाएँ से दूसरे बैठी हुई ‘अंशु’ की दादी जी 4 जून को सम्पन्न ‘महिला उत्पीड़न विरोधी’ धरने का नेतृत्व कर रही हैं और अंशु पीछे खड़ी हुई हैं। यह घरेलू माहौल का ही असर है कि नन्ही बालिका ‘अंशु’ अपनी दादी जी के साथ-साथ महिलाओं के आंदोलनों में भाग लेती हैं। सबसे ऊपर चित्र में ‘अंशु’ धरने को संबोधित करते हुये एक क्रांतिकारी गीत का पाठ कर रही हैं। कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं :
"कौन गिराए बम बच्चों पर ?
कौन उजाड़े उनके घर ?
चलो पकड़ कर लाएँ उनको।
मुर्गा अभी हम बनाएँ उनको। । "
हमारा सम्पूर्ण परिवार इस नन्ही बालिका के प्रति नत-मस्तक है। हम लोग ‘अंशु’ की सर्वांगीण सफलता एवं स्वस्थ-दीर्घायुष्य की मंगल – कामना करते हैं।
हमारे दृष्टिकोण से ‘अंशु’ का व्यतित्व प्रेरक व सम्मान के योग्य है अन्य दूसरे बच्चों को भी उनके अभिभावक यदि प्रेरित करें तो वे भी अंशु की भांति अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन हेतु आगे आ सकते हैं। इस बच्ची के जज़्बे को देखते हुये बच्चों की क्षमता का आंकलन करता हुआ यह गीत याद आ गया।

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