क्रांति स्वर मानवता के शत्रु हैं ‘ज्योत िष’ विरोधी —विजय राज बली माथुर


इसी ब्लाग के माध्यम से समय-समय पर ज्योतिषीय विश्लेषणों के माध्यम से जनता को आगाह करने के प्रयास किए गए हैं जिनकी खिल्ली ढ़ोंगी-पोंगापंथियों ने तो उड़ाई ही है क्योंकि उनकी लूट के मंसूबे बाधित होते हैं। लेकिन दुखद बात यह है कि खुद को साम्यवादी विद्वान और मार्क्स वाद का शिक्षक बताने वाले लोग भी ज्योतिष की खिल्ली वाहियात ढंग से उड़ाते हैं। ……………
ज्योतिष क्या है?क्यों है?कैसे है?का वर्णन कई-कई बार इसी ब्लाग में किया गया है कुछ के लिंक्स इसके द्वारा मिल जाएँगे-
http://vijaimathur.blogspot.in/2013/06/blog-post_25.html

ऐसे लोगों के बारे में 25 जूलाई 2012 को एक पत्रकार महोदय ने सूचित किया था कि" Asal men Marx ke swaymbhoo thekedaron se hee sabse jyada nuksan marxism ko pahuncha hai."

अधार्मिक संगठन जो खुद को धार्मिक बताते हैं और हमारे प्रगतिशील विद्वान भी उनको ही धार्मिक बताते है भी ‘ज्योतिष’ का विरोध करते हैं क्योंकि यदि ज्योतिष के माध्यम से मानव अपना कल्याण करने में सक्षम हो जाये तो उनको ‘चंदा’ या ‘दान’ देना तो दूर ‘घास’ भी नहीं डालेगा। इन ढोंगियों को शोषक -लुटेरे उद्योगपति/कारपोरेट घराने आदि ‘पुदीने की फुंगी’ पर चढ़ाये रहते हैं। इनके भ्रष्टाचार के संरक्षक तथाकथित नए-नवेले राजनेता बने रहते हैं जिनके संबंध में भाकपा,उ .प्र.के राज्य सचिव महोदय ने 27 जून 2013 को फेसबुक पर यह टिप्पणी दी है-
DrGirish Cpi :और इसी भ्रष्टाचार के धन से केदारनाथ मन्दिर के निर्माण की होड़ लगी है,जनता आस्था के सागर में डूबी रहे और ये उसे लूटते रहें-एहि धर्म सनातनः |
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आइये पोंगापंथी ढोंगियों एवं स्वम्भू मार्क्स वादी विद्वानों की परवाह किए बगैर इन संकेतों पर विचार करें जो ‘चंड-मार्तण्ड निर्णयसागर’ पंचांग के पृष्ठ 36 से 39 पर प्रकाशित हैं। यह पंचांग दिसंबर 2012 में ही मैंने खरीद लिया था जिससे यह अनुमान लगाना सहज है कि कितना पहले ही इन ज्योतिषयों ने गणना द्वारा ज्ञात करके सार्वजनिक कर दिया था।( फिर भी फूहड़ किस्म के लोग प्रगतिशीलता/साम्यवाद की आड़ लेकर शोषकों-उतपीडकों को लाभ पहुंचाने हेतु ‘ज्योतिष’ की आलोचना करते नहीं थकते हैं। कभी ‘ज्योतिष एक मीठा जहर’ लेख लिख कर IBN7 का कारिंदा ब्लागर लोगों को गुमराह करता है तो कभी ‘डायचे वेले’ से पुरुसकृत वैज्ञानिक ब्लागर ‘ज्योतिष’ पर आग उगलता है और साम्यवादी विद्वान का चोला ओढ़े ‘डायचे वेले’ का पुराना कारिंदा उसी स्वर में अलग राग तांनता है। ):

"चलन कलन रवि भौम का,लक्षण कष्ट निवेश ।
यान खान घटना विविध,ऋतु विषम संदेश। ।
युति योग मंगल रवि,राजतंत्र अधिभार।
मद सत्ता धारक सभी,तंत्र लोक अभिसार। ।
……………………………………………………
चार पाँच ग्रह का बने,युति चार -गतिचार ।
वर्षा अथवा द्वंद से,आंदोलित संसार। । "

यह स्थिति 24 जून 2013 से 22 जूलाई 2013 के लिए घोषित की हुई है। सम्पूर्ण संसार की घटनाओं को तौल लें जिनमे अपने देश के हेलीकाप्टर,ट्रक,कारें,लोडर आदि की दुर्घटनाएँ भी साफ दिख जाएंगी।

23 जूलाई से 21 अगस्त 2013 तक के संबंध में वर्णन देखिये:
"अमा पूर्णिमा भौमवती,सुखद नहीं प्रतिचार ।
ऋतु कोप की आमना,पशु जन कष्ट निहार। ।
क्रूर वार तेजी करें,मावस भौम कुसंग।
मंदी से तेजी बने, वस्तु विविध प्रसंग। । "

इस माह में 06 जूलाई -मंगलवार को अमावस्या तथा 20 अगस्त 2013 -मंगलवार को रक्षा बंधन की पूर्णिमा है। बुधवार 21 अगस्त को सूर्योदय प्रातः 06-17 पर और पूर्णिमा की समाप्ती 07-14 पर है किन्तु ढ़ोंगी-पाखंडी ‘दान-पुण्य’के नाम पर बुधवार को अपनी कमाई की खातिर पूर्णिमा मनाने को कहेंगे तो क्या ग्रहों की चाल को भी थाम सकेंगे?
12 अगस्त 2013 को पंचमी/षष्ठी रहेंगी। उदय तिथि की षष्ठी का क्षय है। परिणाम जानिए :
"शुक्ल पक्ष श्रावण कभी, किसी तिथि का नाश।
शासी नेता आपदा,भावी तीनों मास। । "
अर्थात यह स्थिति 20 नवंबर 2013 तक के लिए बहुत पहले ही घोषित की जा चुकी है। अब बजाए सुरक्षात्मक उपाय करने के ‘ज्योतिष’ पर थोथा आरोप लगा कर इसकी आलोचना करने वालों की बुद्धि का उनके पैर के तलवों में निवास समझिए। जिसकी बुद्धि उसी के पैरों तले कुचली हुई हो उसकी बातों का क्या भरोसा?

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