क्रांति स्वर सत्य को झुठलाने का प्रयास सत्य को सत्यापित कर गया —विजय राजबली माथुर


" उन्होने मुझे पार्टी ब्लाग पर एडमिन राईट्स देकर लिखने को कहा जबकि पिछले छह वर्षों से पार्टी के प्रदेश सचिव तक को उन्होने एडमिन नहीं बनाया था। मुझे इसमें उनकी गहरी चाल नज़र आई और मैंने पार्टी के प्रदेश सचिव डॉ गिरीश जी व प्रदेश सह-सचिव डॉ अरविंद राज जी को उनकी अनुमति लेकर एडमिन बना दिया। इस पर का सं महोदय मुझसे ज़बरदस्त खार खा गए। उन्होने अपने समक्ष मुझे ब्लाग पोस्ट करने को कहा जिससे कि वह मेरा ID पासवर्ड जान कर अपने अज़ीज़ ब्लागर्स से संबन्धित मेरे पोस्ट्स डिलीट कर सकें।…………………………………………………………………
……………. 09 सितंबर को का सं महोदय ने राष्ट्रीय सचिव कामरेड अनजान साहब से संबन्धित मेरी एक पोस्ट भी ब्लाग से डिलीट कर दी और मुझे एडमिन व आथरशिप से हटा दिया।अगले ही दिन 10 सितंबर 2013 को मैंने ‘साम्यवाद (COMMUNISM)’ नामक एक अलग ब्लाग बना कर उसमें उस डिलीटेड पोस्ट को भी प्रकाशित कर दिया। तब से अब तक 112 दिन में 92 पोस्ट्स प्रकाशित हो चुकी हैं जिनको 5441 बार पढ़ा जा चुका है और 18 ब्लाग फालोर्स हो चुके हैं। जब 04 जून को पहली पोस्ट मैंने पार्टी ब्लाग में दी थी तब उसके फालोअर्स 50 थे और जब मुझे उससे प्रथक किया गया -09 सितंबर को उस ब्लाग के फालोअर्स बढ़ कर 65 हो चुके थे। 20 नवंबर 2013 से हमने एक नया फेसबुक ग्रुप ‘UNITED COMMUNIST FRONT’ भी प्रारम्भ कर दिया है और आज तक 216 कामरेड्स उसके सदस्य बन चुके हैं।" यह 31 दिसंबर को प्रकाशित एक लेख के अंश हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि इसके तथ्यों को छिपाने के उद्देश्य से उन कार्यकारी संपादक महोदय ने अपने उन मौसेरे भाई जिनहोने मुझे फेसबुक पर श्रद्धांजली दी थी के साथ मिल कर 14-15 फर्जी लोगों से फेसबुक पर मेरे आई डी को फेक घोषित करा के अस्थाई रूप से ब्लाक करा दिया जिस कारण अभी फेसबुक ग्रुप्स में लिंक नहीं लग पा रहे हैं।
उन लोगों के इस कृत्य से तो मेरे द्वारा वर्णित सत्य का ही सत्यापन हो जाता है कि वह मेरा आई डी/पासवर्ड ज्ञात कर कुराफ़ात करना चाहते थे। उनकी समझ है कि प्रतिबंधित करा के वे मेरे पोस्ट्स को लोगों तक कुछ समय तक पहुँचने से रोकने में कामयाब हो जाएंगे। परंतु यही बात उनकी ‘नैतिक पराजय’को भी रेखांकित करती है।
Vijai RajBali Mathur

8 hours ago near Lucknow

गृह युद्ध तब,अब दूर नहीं—विजय राजबली माथुर
जिस प्रकार कारपोरेट वर्ग का एक खेमा और वर्तमान पी एम मनमोहन सिंह जी केजरीवाल की पीठ पर खड़े हैं और पर्दे के पीछे से RSS का जो समर्थन उनको प्राप्त है उससे तो यही लगता है की यदि इस बार भी जनता को छल कर यदि केजरीवाल को केंद्र की सत्ता सौंप दी गई तो दक्षिन पंथी असैनिक तानाशाही स्थापित करने का पहला चरण पूर्ण हो जाएगा और तब लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से उसे अपदस्थ करना दुष्कर हो जाएगा क्योंकि ‘सलवा जुडूम’ जैसे कृत्य करके उसका बचाव RSS तब खुल कर करेगा। उन परिस्थितियों में किसान-मजदूर के हिमायती हिंसक नक्सली गुट ही उसका मुक़ाबला करने को सामने रहेंगे। शोषित-उत्पीड़ित जनता तब उन हिंसक नक्सलियों का ही साथ देगी न कि साम्यवाद का चोला ओढ़े कारपोरेट दलालों का। वह समय शीघ्र भी आ सकता है यदि समय रहते समस्त कम्युनिस्ट लोकतान्त्रिक शक्तियाँ एकजुट होकर ‘आ आ पा =आप’,भाजपा/इन्दिरा कांग्रेस के विरोध में न आकर बंट कर परस्पर संघर्ष करती रहीं तो।

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Vijai RajBali Mathur

9 hours ago near Lucknow

कम्युनिस्टों के बीच छिपे कारपोरेट दलालों/आ आ पा/केजरी समर्थकों ने पहले तो फेसबुक ग्रुप्स में ‘साम्यवाद(COMMUNISM)’ ब्लाग को ब्लाक करवाया फिर उसके बाद मेरी उस आई डी जिसके द्वारा उक्त ब्लाग का लेखन होता था उसको ब्लाक करवा दिया है। अतः उस ब्लाग पर पोस्ट्स पढ़ने के इच्छुक लोगों से प्रार्थना है कि स्वतः ही ब्लाग का अवलोकन कर लिया करें जब तक कि पोस्ट्स फेसबुक और इसके ग्रुप्स में लिंक करना प्रतिबंधित है।

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~विजय राजबली माथुर ©
इस पोस्ट को यहाँ भी पढ़ा जा सकता है।

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