क्रांति स्वर नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर विवाद क्यों? — विजय राजबली माथुर


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एशिया न्यूज़ के संपादक पुष्प रंजन साहब ने 15 अप्रैल 2015 को प्रकाशित एक लेख में विस्तृत रूप से बताया है कि जिस जर्मनी से वह सहयोग कर रहे थे उसने भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पीछे अपने जासूस लगा रखे थे। उनके जिन पौत्र सूर्य बोस के हवाले से भारत में उनकी जासूसी करवाने की जांच की मांग की जा रही है वह इस लेख के मुताबिक नेताजी सुभाष बोस के भतीजे अमियनाथ बोस के पुत्र हैं।

अमियनाथ बोस जी ने यह आरोप लगाते हुये कि फारवर्ड ब्लाक (जिसका गठन स्वम्य नेताजी ने किया था ) नेताजी के आदर्शों से भटक गया है ‘आज़ाद हिन्द संघ’ नामक एक नया राजनीतिक दल बना लिया था। बताया गया था कि इसमें नेताजी की आज़ाद हिन्द फौज के सेनानी शामिल हैं। मेरठ के भैंसाली ग्राउंड में प्रति वर्ष 23 जनवरी को इस संघ की ओर से नेताजी की जयंती मनाई जाती थी। इस कार्यक्रम में प्रतिवर्ष तत्कालीन सयुस और संसोपा नेता और वर्तमान में भाजपा कार्यकारिणी के सदस्य सतपाल मलिक साहब (पूर्व अध्यक्ष- छात्र संघ, मेरठ कालेज, मेरठ) ज़ोर-शोर से नेताजी के विमान हादसे में मृत्यु होने की जांच की मांग उठाते थे। हालांकि ‘शाहनवाज़ जांच आयोग’ व ‘खोसला जांच आयोग’ ने विमान हादसे को ही सही घोषित कर दिया था।
सतपाल मलिक जी तब तक के तीनों प्रधानमंत्रियों पर नेताजी की उपेक्षा किए जाने के संदर्भ में मुकदमा चलाये जाने की मांग भी उठाते थे। एक वर्ष ललिता शास्त्री जी भी उस कार्यक्रम में अतिथि थीं उस वर्ष उनके द्वारा सिर्फ पहले व तीसरे प्रधानमंत्री पर मुकदमे की बात उठाई गई थी व ललिता जी को माताजी का सम्बोधन दिया गया था। उसके बाद से फिर तीनों प्रधानमंत्रियों पर मुकदमे की मांग उनके द्वारा की जाती रही थी। जिस प्रकार 1962 के चीनी आक्रमण को कुछ लोगों द्वारा नेताजी की ‘मुक्ति वाहिनी’ की संज्ञा दी गई थी उसी प्रकार 1971 के बांगला देश के ‘आमार सोनार बांगला’ आंदोलन को मलिक जी द्वारा नेताजी प्रेरित बताया जाता था। अपनी बात की पुष्टि के लिए मलिक जी शेख मुजीबुर रहमान के इस वक्तव्य की ओर ध्यानाकर्षण करते थे जिसमें कथित रूप से उन्होने कहा था- ‘मेरे दो गुरु थे, हैं : सुहारा वर्दी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस’। इस आधार पर मलिक जी उस समय तक नेताजी को जीवित मानते थे जैसा कि अमियनाथ बोस जी व उनके आज़ाद हिन्द संघ का कहना था।
ऐसा भी माना जाता है कि नेताजी जर्मन विनायक दामोदर सावरकर के कहने पर नज़रबंदी से भाग कर गए थे। सावरकर का संघ और जनसंघ देश में लोकप्रियता पाने में विफल रहे थे इसलिए अमियनाथ जी (जिंनका चरित्र संजय गांधी जैसा था ) को आगे करके आज़ाद हिन्द संघ गठित करवाया गया था आज उनके ही पुत्र मोदी के समक्ष मांग उठा रहे हैं जो संघ-नियंत्रित केंद्र सरकार के मुखिया हैं। जो नेताजी समाजवाद और साम्यवाद के लिए संघर्ष करते थे उनको हिटलर का समर्थन लेने के कारण संघी अपने रंग में अब रंग दे रहे हैं जबकि हिटलर से तो अनाक्रमण समझौता खुद स्टालिन ने भी कर रखा था जिसे विंस्टन चर्चिल ने तिकड़म करके हिटलर द्वारा रूस पर आक्रमण करके तुड़वा दिया गया था। इसी वजह से हिटलर का पतन हुआ और नेताजी को जापान जाना पड़ा था।
नेताजी का खुद को भांजा बताने वाले रेलवे के पूर्व क्लर्क प्रभात रंजन सरकार ने आनंद मूर्ती नाम से ‘आनंद मार्ग’ और इसके राजनीतिक विंग- ‘प्राउटिस्ट ब्लाक आफ इंडिया’ का गठन किया था जिसने कई चुनावों में विफलता के साथ भाग भी लिया था। इंदिराजी ने प्रेमपाल रावत उर्फ बाल योगेश्वर ( जो अब यू एस ए से अपनी गतिविधियां चला रहा है) के ‘डिवाईंन लाईट मिशन’-‘दिव्य ज्योति परिषद’ , प्रभात रंजन सरकार उर्फ आनंद मूर्ती के आनंद मार्ग तथा लेखराज कृपलानी (पूर्व हीरा व्यापारी) के ‘ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय’ को पुलिस कारवाई द्वारा नियंत्रित कर लिया था जो कि देशद्रोही गतिविधियों में संलग्न थे और अब पुनः सक्रिय हो गए हैं।
कार्गिल से लेह जाने वाले मार्ग पर स्थित ‘द्रास’ क्षेत्र में ( जो जोजीला दर्रे की वजह व राजग सरकार में पाक से युद्ध के कारण विख्यात है ) ‘प्लेटिनम’ धातु जो ‘स्वर्ण’ से भी अधिक मूल्यवान होती है तथा जिसका उपयोग यूरेनियम के निर्माण में भी होता है प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसी के कारण काश्मीर 1947 से ही विवादित चल रहा है क्योंकि यू एस ए, जर्मन और कनाडा तथा रूस व चीन की निगाहें भी इसके भंडार पर लगी हुई हैं। यदि जोजीला पर सुरंग- टनल बन जाये तो श्रीनगर से लेह तक का सफर कुछ ही घंटों का हो जाये। कनाडा की एक फर्म ने नाम-मात्र शुल्क पर और जर्मन की फर्म ने निशुल्क इस टनल को बनाने का प्रस्ताव इंदिरा जी को दिया था किन्तु उनकी शर्त थी कि ‘मलवा’ वे अपने देश ले जाएँगे। इंदिरा जी शुल्क देने को तैयार थीं किन्तु ‘मलवा’ नहीं तो इसी ‘प्लेटिनम’ की वजह से ही।
काश्मीर से आर्टिकल 370 हटवाने की मांग इसी प्लेटिनम पर कब्जे की इच्छुक विदेशी शक्तियों के इशारे पर उठती रही है और अब वहाँ की सत्ता में ऐसे मांग-कर्ता भी शामिल है उनके ही समक्ष जर्मन प्रवासी सूर्य बोस जी ने नेताजी पर ताज़ा विवाद शुरू करा दिया है। नेताजी की पुत्री अनीता बोस जी खामोश हैं जैसा कि पुष्प रंजन जी का लेख कहता है।
इस वक्त नेताजी पर विवाद को आर्टिकल 370 हटाने की मांग, जोजीला क्षेत्र के ‘प्लेटिनम’ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए और देश-रक्षक शक्तियों को एकजुट होकर षड्यंत्र को विफल करना चाहिए।

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