क्रांति स्वर पूंजी,पूजा,धर्म और विभ्रम – —– विजय राजबली माथुर


पूजा और धर्म मानव जीवन को सुंदर,सुखद और समृद्ध बनाने के लिए थे लेकिन आज पूंजी -वाद के युग में इनको विकृत करके विभेद व विभ्रम का सृजक बना दिया गया है। क्या पढे-लिखे और क्या अनपढ़ सभी विभ्रम का शिकार हैं ; कुछ अनजाने में तो कुछ जान-बूझ कर भी।
धर्म शब्द की उत्पत्ति धृति धातु से हुई है जिसका अर्थ है धारण करना अर्थात मानव जीवन व समाज को धारण करने हेतु आवश्यक तत्व ही धर्म हैं अन्य कुछ नहीं, यथा—-
सत्य, अहिंसा (मनसा-वाचा-कर्मणा ), अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य।
आज इन तत्वों/लक्षणों का पालन न करने वाले ही खुद को धर्म का ठेकेदार घोषित किए हुये हैं।
पूजा भगवान की करनी थी जड़ पदार्थों की नहीं, लेकिन आज जड़-पूजक ही खुद को भगवान-भक्त घोषित करके मानवता को कुचलने पर आमादा हैं।
भगवान/खुदा/गाड को समझते नहीं और इनके नाम पर झगड़ा खड़ा करने को तैयार रहते हैं।
भगवान = भ (भूमि-पृथ्वी ) +ग (गगन-आकाश )+व (वायु-हवा ) +I (अनल-अग्नि ) + न (नीर-जल )=भगवान ।
खुदा = चूंकि ये पाँच तत्व खुद ही बने हैं इनको किसी मानव ने बनाया नहीं है अर्थात ये ही खुदा हैं।
गाड = चूंकि इन तत्वों का कार्य G (जेनरेट )+ O (आपरेट ) + D (डेसट्राय ) है इसलिए ये ही GOD हैं।
इनकी पूजा का अर्थ है इन तत्वों का संरक्षण व संवर्धन अर्थात प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है कि वह भगवान/खुदा/गाड तत्वों की रक्षा करे व उन्हें नष्ट होने से बचाए। लेकिन आज हो क्या रहा है? अलग-अलग नाम पर इनको नष्ट करने का मानवीय दुष्चक्र चल रहा है वह भी धर्म के नाम पर।
ज्योतिष वह विज्ञान है जो मानव जीवन को सुंदर, सुखद व समृद्ध बनाने हेतु चेतावनी व उपाय बताता है। लेकिन आज इस विज्ञान को स्वार्थी व धूर्त लोगों ने पेट-पूजा का औज़ार बना कर इसकी उपादेयता को गौड़ कर दिया व इसे आलोचना का शिकार बना दिया है। एक सप्ताह की ये अखबारी कटिंग्स जो बताती हैं ज्योतिष ने उनका पूर्वानुमान पहले ही कर दिया था किन्तु उस पूर्वानुमान को चेतावनी के रूप में बचाव के उपाय करने की किसी ने भी ज़रूरत नहीं समझी, क्यों ?
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नीमच से प्रकाशित ‘चंड-मार्तंड ‘पंचांग के पृष्ठ 50 पर 26-12-2015 से 23-01-2016 की ग्रह-स्थिति का वर्णन था :
दिवद्वादश मंगल शनि भृगु भौम प्रस्तार।
हिम प्रपात पर्वत पतन,मार्ग रोग विस्तार। ।
मेघ गाज वर्षा गति, लहर शीत अभिसार।
यान खान घटना विविध,शासन पक्ष विकार। ।
इस दौरान आकाश में ‘मंगल’ तुला राशि में होकर वृश्चिक के ‘शनि’ के साथ दो-बारह के संबंध में रहा जिससे पृथ्वी के पश्चिमी व पूर्वी गोलार्द्ध में शीत व हिम का प्रकोप रहा परंतु न भारत न ही यू एस ए की सरकारों ने कोई सुरक्षात्मक कदम उठाए ।
पृष्ठ 52 पर मंगल-शनि की इसी युति के साथ-साथ ‘बुध’, ‘शुक्र’ दोनों के एक साथ धनु राशि में स्थिति का परिणाम इस प्रकार पहले से ही वर्णित है जिस संबंध में मौसम विभाग अब आगाह कर रहा है :
युति योग शनि भौम का, नहीं सुखद प्रस्तार।
विस्फोटक भय आपदा, भू-क्रंदन प्रतिचार। ।
क्षति विश्व, सुख संपदा जन धन क्षति प्रहार।
यान खान घटना विविध, हरण करण विस्तार। ।
आतंक द्वंद रचना मही, अस्त्र शस्त्र प्रस्तार।
व्यय विशेष रचना गति, सांसारिक प्रतिभार। । ।
युति योग बुध शुक्र का, ऋतु विषम प्रतिचार।
हिम तुषार पर्वत क्षति, फसल कोप प्रतिचार। ।
लहर शीत महिमा गति, ग्रह गोचर संचार।
तट समुद्र पर आपदा, जन धन क्षति विचार । ।
यदि अफगानिस्तान में भूकंप आया तो दक्षिण-पूर्व एशिया में भी। भारत के पठानकोट में आतंकवादी हमला हुआ तो पाकिस्तान के स्कूली बच्चों पर भी । पश्चिम एशिया तो युद्ध का अखाडा बना ही हुआ है।
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और अब देखिये एक बड़े कारपोरेट घराने के बड़े अखबार के बड़े संपादक महोदय के पूजा, धर्म और ज्योतिष पर विचार जिनको पढ़ कर कैसे कहा जा सकता है कि ये एक विद्वान के विचार हैं? :
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बताइये भला जड़ पदार्थ (संपादक जी खुद ही लिखते हैं वहाँ एक पत्थर का टुकड़ा है ) को क्या पूजना ? फिर इतनी मूर्खता सिर्फ पुरुषों तक ही नहीं सीमित रहनी चाहिए उसका विस्तार महिलाओं तक भी होना चाहिए और महिलाएं खुद भी ऐसी मूर्खता करने के लिए लालायित हैं। संपादक पंडित जी ने ही लिखा है कि पहले वहाँ वीरान सा था अब भव्य मंदिर व दुकानें हैं। स्पष्ट है यह पूंजी का खेल है जिसमें अबोध जनता सिर्फ इसलिए पिस रही है क्योंकि बुद्धिमान लोग व संपादक जी-पंडित जी उसे ऐसा ही करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। धर्म,पूजा व ज्योतिष की इन अनर्थकारी परिभाषाओं-व्याख्याओं ने सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा नजदीक ला दिया है।

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