विद्रोही स्व-स्वर में डॉ नरेंद्र राजबल ी : एक और बुजुर्ग का कम होना —— विजय राजबली माथ ुर


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Late Dr. N.R.B. Mathur

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आज प्रातः वीरेंद्र चाचा के ई-मेल से नरेंद्र चाचा के यह दुनिया छोड़ जाने का समाचार ज्ञात होकर असीम वेदना व दुख हुआ। चाचा हमारे बाबूजी के चचेरे भाई थे , लेकिन हमारे बाबाजी स्व.धनराज बली साहब व चाचा के पिताजी स्व . धर्मराज बली साहब में काफी घनिष्ठता थी। बाबूजी की भी दिवंगत चाचा से घनिष्ठता रही । एक बार हमारे बाबूजी चार-पाँच माह के लिए फरीदाबाद हमारे छोटे भाई के पास गए हुये थे, और हम आगरा में थे । मथुरा चाचा के पास मिलने गए थे तब उन्होने कहा था – " विजय तुम यह न समझना कि, दरियाबाद 400 km दूर है और तुम्हारे बाबूजी भी 200 km दूर हैं लेकिन हम तुम्हारे पास ही 50 km हैं। जब ज़रूरत हो तुरंत हमारे पास बेझिझक आ जाना। " ऐसे आत्मीय नरेंद्र चाचा का न रहना किसी झटके से कम नहीं है। इसलिए भाई धीरेन्द्र से फोन पर ज़्यादा देर बात नहीं कर सका।
आदरणीय नरेंद्र चाचा मथुरा में वरिष्ठ दन्त चिकित्सक थे।
लखनऊ आने के बाद से मथुरा न जा सका और चाचा से एक लंबे अरसे से व्यक्तिगत मुलाक़ात न हो सकी थी। पिछले वर्ष जब उनसे फोन पर बात हुई थी तब उन्होने मथुरा आने को कहा था। वैसे वह अभी भी सक्रिय रहते थे , ज़्यादा दिन बीमार भी नहीं रहे थे। हम उनकी पुण्य आत्मा की शांति के लिए परम-पिता परमात्मा से प्रार्थना करते हैं। उन की यादें सदा मन में बसी रहेंगी।

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